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आँख के रोग – Diseases of the Eyes कान का दर्द – Otalgia कान बहना – Otorrhoea-दमा – Asthma

आँख के रोग – Diseases of the Eyes

● जब आँख की पलकों पर गुहेरी हो जाये – (स्टेफिसेगिरिया 30 या हिपर सल्फ़ 1M)

● जब आँखों में नेत्र शोथ(Conjunctivitis) हो जाये – (एकोनाइट 30, दिन में 3-4 बार)

● निकट दृष्टि दोष(Myopia) यानि की निकट की वस्तु दिखे परन्तु दूर की वस्तु ठीक से न दिखे तो – (फाइसोस्टिगमा 3X या 6, दिन में 3 बार)

● रतौंधी, यानि की रात के अंधेरे में ठीक से न देख पाना – (फाइसोस्टिगमा 3X या 6, दिन में 3 बार)

● दिनौंधी, यानि की दिन में ठीक से न देख पाना – (बोथरौप्स 30, दिन में 3 बार और फ़ॉसफोरस 200, सफ्ताह में 1 बार)

● मोतियाबिंद – (फ़ॉसफोरस 200, सफ्ताह में 1 बार तथा कल्केरिया फ्लोर 6 या 12X दिन में 3 बार)

कान का दर्द – Otalgia कान बहना – Otorrhoea
बहरापन या कम सुनना – Deafness
कान में आवाज होना – Sound in ear आवाज बैठना – Hoarseness

सर्दी लगने, कान में सूजन हो जाने, चोट लगने, कान में अधिक मैल हो जाने, या कान में फुन्सी हो जाने की वजह से कान में दर्द होता है l

● जब अचानक ठण्ड लग जाने से कान दर्द शरू हुआ हो – (एकोनाइट 30, हर 2 घंटे पर)

● असहनीय दर्द जो गर्म सेक से बढे – (कैमोमिला 30, हर 2 घंटे पर)

● अचानक दर्द शुरू हो, कील चुभने सा अभास हो – (बेलाडोना 30, हर 2 घंटे पर)

● कान में फुन्सी हो, कान से स्राव आए जिसमे खट्टी बदबू आए – (हिपर सल्फर 30, दिन में 3 बार)

कान में प्लांटेगो Q व मुल्लियन ऑयल (Mullian Oil) डालने से भी बहुत फायदा होता है l

कान बहना – Otorrhoea

यह बीमारी प्रायः कई कारणों से होती है जैसे कान में सूजन, खसरे के बाद आदि l

● गाढ़ा पीला स्राव – (पल्साटिला 30, दिन में 3 बार)

● जब स्राव बहुत चिपचिपा निकले – (काली बाई 30, दिन में 3 बार)

● कान बहने की पुरानी बीमारी में – (साइलिसिया 12X या 30, दिन में 3 बार)

● जब कान बहने के साथ साथ दर्द भी हो – (हिपर सल्फर 30, दिन में 3 बार)

● जब कान से बदबूदार स्राव आए और अन्य दूसरी दवा से फायदा न हो – (सोराइनम 1M , 10 -15 दिन में एक बार)

बहरापन या कम सुनना – Deafness

कम सुनने के कई कारण हो सकते हैं जैसे सर्दी लगना, माथे पर चोट लगना, कान पकना, कान में मैल जम जाना या बहुत लम्बे समय तक बीमार रहना आदि l जन्म से बहरेपन का कोई इलाज नहीं है l

● पुरानी जुकाम के बाद या चेचक के बाद हुए बहरापन में – (मर्क सौल 30, दिन में 3 बार)

● खसरे के बाद कान की खुश्की के कारण के कारण हुआ रोग – (कार्बो वेज या पल्साटिला 30, दिन में 3 बार)

● बबासीर के बाद बहरापन होना – (नक्स वोमिका 30, दिन में 3 बार)

कान में आवाज होना – Sound in ear

कान के परदे पर बहुत ज्यादा दवाब पड़ने के कारण कई बार कान में तरह तरह का शोर होता है l

● चबाते समय कान में शोर सुनाई देना – (काली सल्फ़ 6X या 30, दिन में 3 बार)

● गाने की या हिस हिस की आवाज सुनाई देना – (काली आयोडायड 6X या 30, दिन मे 3 बार)

● कान में रेलगाड़ी चलने की आवाज या चिड़िया की चहचहाट जैसा सुनाई दे – (काली मयूर 6X या 30, दिन में 3 बार)

● मासिक होने से पहले कान में शोर सुनाई दे – (फैरम मेट – 3X या 30, दिन में 3 बार)

● कान में तूफ़ान चलने की आवाज या घंटियों की आवाज आये – (लीडम पाल 30, दिन में 3 बार)

● अपनी हीं आवाज कान में बार बार गूंजे – (लाइकोपोडीयम 30, दिन में 3 बार)

आवाज बैठना – Hoarseness

आवाज निकालने के लिए गले मे स्वरयंत्र (Vocal chords) हैं, इनमें सर्दी लगना, ऊँची आवाज में ज्यादा बोलना, आबो-हवा बदलना , आदि के कारण गले मे दर्द, श्वास कष्ट, आदि इस रोग के लक्षण हो सकते हैं।

● पूरी तरह आवाज बैठ जाने पर – (अर्जेंमैट 30, दिन में 3 बार)

● ठंडी हवा से आवाज बैठना – (ऑरम ट्रिफाइलम 30, दिन में 3 बार)

● अचानक खुश्क ठंडी हवा लगने से – (एकोनाइट 30, दिन में 3 बार)

● ठंड लगने से या ठंडी चीज खाने से रोग – (हिपर सल्फ 30, दिन में 3 बार)

● चिल्लाने या भाषण देने से हुआ रोग – (आर्निका 30, दिन में 3 बार)

फाइटोलक्का Q की 10 बूंद, गुनगुने पानी में मिलाकर गरारे करने से लाभ होता है।

दमा – Asthma

फेफड़े में हवा ले जाने वाली नालियों (Bronchi) तथा फेफड़ों (Lungs)में जब श्लेष्मा (Mucous)जमा हो जाता है, निकाले नहीं निकलता, सांस मुश्किल से आता है, छाती से सांय सांय की आवाज आती है, सीटियां सी बजती हैं, रोगी हवा के लिए तरसता है, अक्सर रात में कष्ट बढ़ता है l

कारण : मानसिक उत्तेजना, कब्ज, वात,धूल, या धुएं भरे वातावरण में रहना l ज्यादा मात्रा में ख़राब भोजन करना l यह रोग वंशानुगत भी हो सकता है l

● एकाएक तेज दमे का आक्रमण (acute attack) l रोग के शुरू में – जब बेचैनी व मितली हो l – (एकोनाइट Q, इपिकैक Q, 10-10 बूंद पहले 1 घंटे के अंतर से अदल-बदल कर व आराम आने पर 3-3 घंटे के बाद दें)

● जब रात के 12 बजे रोग बढ़े, बेचैंनी व प्यास अधिक हो – (आर्सेनिक एल्ब 6 या 30, दिन में 4 बार)

● दमा के प्रकोप को कम करने के लिए, जब दम घुटे, सांस ठीक से न ली जाय – (ब्लैटा ओ Q, सेनेगा Q, ग्रिंडीलिया Q व कैशिया सोफोरा Q बराबर मात्रा में मिला कर दें )

● मितली, कलेजे में संकुचन, दम घुटे, जीभ साफ़ हो – (इपिकैक 6 या 30, 2-2 घंटे के बाद)

● सोने से तकलीफ बढ़े, श्लेष्मा निकलने से आराम आए l प्रौढ़ स्त्रियों में रजःस्राव बंद होने के समय दमा – (लैकेसिस 30, 3-3 घंटे के बाद)

● थोड़ी देर सोने के बाद तकलीफ बढ़े – (अरेलिया रेसिमोसा Q या 30, दिन में 3 बार)

● रोग जब अंग्रेजी दवा(steroids etc) लेने के बाद आए, रोगी ठंडी प्रकृति का हो – (थूजा 1M या 200)

● जब इओसिनोफिल्स की मात्रा बढ़ जाए l सांस फूलने लगे – (थायरोएडिन 200 या 1M व लैकेसिस 30)

● वाहनों के धुंए या इंडस्ट्रियल पॉल्यूशन से रोग हो या बढ़ता हो – (एसिड सल्फ्यूरोसम 30, दिन में 3 बार)

● जब रोगी सिर्फ खड़ा रह कर सांस ले सके – (कैनाबिस इंडिका 200 या 1M)

● सूती कपड़ा बुनने व रुई धुनने वाले मजदूरों में – (गौसिपियम 30, दिन में 3-4 बार)

● पत्थर तोड़ने वाले मजदूरों में – (साइलिशिया 30, दिन में 3-4 बार)

● फूलों की खुश्बू से – (ऐलेन्थस जी. 30, दिन में 3-4 बार)

● गुस्से की वजह से रोग बढ़े – (कैमोमिला 200 या 1M)

● मल्लाहों का दमा, जहाज पर समुद्र में रहने से ठीक रहे और समुद्र तट पर आने से उभर आए – (ब्रोमियम 30, दिन में 3 बार)

● मानसिक तनाव या अशांति के कारण, धुएं से बढ़े – (इग्नेशिया 200 या 1M)

● बायोकैमिक दवा – (मैग्नीशिया फॉस 6X व काली फ़ॉस 6X अदल-बदल कर 3-3 घंटे के बाद)

मांस-मछली, दूध, सफ़ेद चीनी, केक, पेस्ट्री, मैदा के बिस्किट, सफ़ेद डबल रोटी, व मैदा से बनी चीजें न दें l आटा मोटा पिसा इस्तेमाल करें l शहद, सलाद, ताजी सब्जियां, उबला अंडा, पनीर आदि इस्तेमाल करें l रात का भोजन कम व सांयकाल ही कर लें l

खुजली – Itch बाल का गिरना – Falling of hair

खुजली – Itch

इस रोग में शरीर में खुजली, त्वचा का लाल हो जाना, खुजलाते – खुजलाते खून निकल आना, गर्मी लगना आदि लक्षण होते हैं l इस रोग में बाहरी मलहम लगा देने पर रोग दब जाता है और शरीर के दुसरे अंग में हो जाता है l इसलिए इस रोग को दबाना नहीं चाहिये l इसे खाने की दवा से ही ठीक करना चाहिये l रोग की उग्रता कम करने के लिए सल्फर या बैन्जिल बैंजोएट लोशन इस्तेमाल किया जा सकता है l रोगी के कपड़े 2 – 3 दिन पर गर्म पानी में धोने चाहिये l

● मुख्य दवा, जब रोग नहाने – धोने से बढ़े – (सल्फर 6 या 30, दिन में 3 बार)

● शरीर में छोटे छोटे दाने और खुजली, बेचैंनी, ठण्ड से रोग बढ़े – (रस टाक्स 30, दिन में 3 बार)

● जब खुजली के साथ थोडा दर्द भी हो – (सोराइनम 200, दिन में 2 – 3 बार)

● जब रात में खुजली बहुत ज्यादा हो – (मर्क सौल 30, दिन में 3 बार)

● जननेंद्रिय की खुजली में – (ऐम्बरा ग्रिजिया 30, दिन में 3 बार)

● जब खुजली का कारण छोटे छोटे मवाद भरी फुंसियां हो – (हिपर सल्फर 30, दिन में 3 बार)

● खुजली इतनी हो की खुजलाते खुजलाते खून निकल आये – (मेजेरियम 30, दिन में 3 बार)

बाल का गिरना – Falling of hair

● बाल गुच्छे के रूप में झड़ते हो . कभी यहाँ से कभी वहां से , चकत्ते के रूप में – (फास्फोरस 30 या 200, दिन में 2 बार तथा कैल्केरिया फ़ॉस 6X दिन में 4 बार )

● सफ़ेद खुश्क रूशी के कारण बालों का झड़ना , बालों का टूटकर गिरना – (थूजा 30, दिन में 3 बार )

● चिंता तथा मानसिक अवसाद के कारण सिर , भौं , पलकों , तथा , जननांग से बाल झड़ना – (एसिड फॉस 30, दिन में 3 बार)

● कंघी करने पर बाल टूटना – (कार्बो वेज , चाइना तथा बिस्बैडेन 30, दिन में 3 बार)

● सिफलिस के कारण बाल झड़ना – (अस्टिलेगो Q या 30 तथा फ्लोरिक एसिड 30, दिन में 3 बार)

● महिलाओं को प्रसव के बाद बाल झड़ना – (चाइना , कार्बो वेज , बिस्बैडेन . सभी 30, दिन में 3 बार)

● जब कोई खास कारण पता न चले – (सेलेनियम , फास्फोरस , कैल्केरिया फ़ॉस, एसिड फॉस)

● बालों को तेजी से बढ़ने और चमक लाने के लिए – (बिस्बैडेन 30, दिन में 3 बार)

(बाल जल्दी सफेद होना – Grey hair)

● मुख्य दवा बाल जल्दी सफ़ेद हो जाना – (थायरोडीन 30 या 200, दिन में तीन बार)

● बाल जल्दी सफ़ेद हो जाने की अवस्था में दोनों दवा एक के बाद दूसरी एक एक सफ्ताह के अंतर पर – (लाइकोपोडीयम 200 और एसिड फास 200)

● अगर ऊपर दी गयी दवाओं से लाभ न हो तो – (पाइलोकारपस 1M, सफ्ताह में 1 बार)

बिना मुंह का फोड़ा – Carbuncle-काली खांसी – Whooping-Cough

बिना मुंह का फोड़ा – Carbuncle

यह फोड़ा अक्सर मधुमेह (Diabetes) के मरीजों को हुआ करता है। यह गर्दन, पीठ, कंधे, कूल्हे, कहीं भी हो सकता है। इसकी जड़ें शरीर के भीतर नाड़ियो तक फैल जाती हैं। जब यह फटता है तो कई जगह से मवाद रिसने लगता है इसमें बहुत जलन व दर्द होता है।

● बिना मुंह के फोड़े की प्रमुख दवा – (ऐंथ्राक्सिनम 200)

● बहुत जलन होती है और जैसे फोड़े पर जलते अंगारे रखे हों ऐसा दर्द होता है। गर्म सेक से अच्छा लगता है – (आर्सेनिक 30)

● बहुत बेचैनी व जरा सी भी छुअन बर्दाश्त नहीं होती – (हिपर सल्फ 30)

● जब फोड़ा बहुत धीरे धीरे बढ़े उसमें से मवाद आने लगे – (साइलिशिया 12x)

● जब खून में शक्कर की मात्रा ज्यादा होने के कारण फोड़ा ठीक न होता हो – (सिजीजियम Q, या 30)

यदि फोड़ा मधुमेह के मरीज को हो तो मधुमेह को किसी भी तरह से नियंत्रण में रखना अति आवश्यक है।

काली खांसी – Whooping Cough

श्वासतंत्र, स्वरतंत्र की सूजन और साथ ही स्वरनली में अकड़न हो और और खांसी आए तो उसे काली खांसी कहते हैं l

लक्षण: शुरू में हल्का सा बुखार, छींके, जुकाम, व आंखो से पानी; बाद में खांसी के दौरे पड़ने लगते हैं l खांसते खांसते सांस रुक जाता है, चेहरा लाल या नीला l आंखे लगता है की निकल पड़ेगी, नसें फूल जाती है और थोड़े समय के अन्दर ही खांसी प्राणघातक रूप धारण कर लेती है l यह बच्चों की जानलेवा बीमारी है l

● रोग की शुरू अवस्था में ; जब काफी बेचैंनी हो – (एकोनाइट 30, हर 2 घंटे बाद)

● चेहरा लाल हो, सिर दर्द हो l शरीर की उपरी भाग में रक्त का जमाव हो – (बेलाडोना 30, 2-3 घंटे पर)

● जब ठण्ड लगने के कारण खांसी हो, गले में मछली का कांटा फंसने जैसा आभास हो – (हिपर सल्फ़ 30, दिन में 4 बार)

● जब बलगम गाढ़ा व तार की तरह खिंचने वाला हो; सुबह के समय ज्यादा हो – (काली बाई 30, दिन में 4 बार)

● जब नींद में या नींद के बाद रोग बढ़ता हो l गले के पास कपड़ा तक न सुहाए – (लैकेसिस 30, दिन में 3 बार)

● जब गले के अन्दर आरी चलने जैसी आवाज हो और कुत्ता खांसी हो – (स्पोंजिया 6 या 30, दिन में 3 बार)

● जब सुखी तेज खांसी सुबह-सुबह 3 बजे ज्यादा हो; खांसी के कारण रोगी उठ बैठे – (काली कार्ब 30, दिन में 3 बार)

● खांसी जल्दी जल्दी हो, सांस तक न ले सके, खांसते समय पेट अन्दर को खिंचा हो – (ड्रोसेरा 30, सिर्फ 2 खुराक)

● छाती बलगम से भरी होने से घड़घड़ हो पर बलगम न निकले, जीभ सफ़ेद हो – (एंटीम टार्ट 30, केवल 2-3 खुराक दें)

पुराने रोग में सिफिलिनम 1M की एक खुराक देकर परटूसिन 1M की एक खुराक अगले दिन दें और फिर उपरोक्त दवाओं में से लक्षण के अनुसार जो दवा उचित समझें दें l ड्रोसेरा Q, 5 बूंद और जस्टिशिया Q, 5 बूंद अदल-बदल कर गर्म पानी में लेने से जल्दी फायदा होता है l

मुहासे – Pimples-lतुतलाना, हकलाना – Stammering, Lisping-न्यूमोनिया – Pneumonia-आधा सीसी का दर्द – Migraine

मुहासे – Pimples

चेहरे पर जवानी के दिनों में छोटे छोटे दाने हो जाते हैं l इनमे अक्सर मवाद भर जाती है या कील बन जाती है l

● मुख्य दवा (चेहरे पर बड़े बड़े कील वाले मुहासे जो माहवारी के समय या कॉफ़ी, मांस आदि खाने से बढे) – (सोराइनम 200 या 1M, सफ्ताह में एक बार)

● जवानी आने के समय मुहासे की दवा – (ऐस्टेरियास रूबेन्स 30, दिन में 4 बार)

● यदि ऐस्टेरियास रूबेन्स से फायदा न हो – (काली ब्रोम 30 और कल्केरिया पिक्रेटा 30 , दिन में 4 बार)

● जब मुहासे सर्दियों में एवं अंडा खाने से बढे – (स्ट्रेप्टोकॉक्सिन 200, दिन में 2-3 बार)

● जब मुहासों में मवाद हो एवं दर्द हो – (हिपर सल्फ़ 30, दिन में 3 बार)

● मुहासों व त्वचा साफ़ करने के लिए – (बर्बेरिस एक्विफोलियम Q, दिन में 3 बार)

● जब उपरोक्त दवायों से फायदा न हो ,रोगी गन्दा रहना पसंद करता हो –(सल्फर 1M, सफ्ताह में 1 बार)

● जवानी के दिनों में, जब पेट में गैस भी बनती हो – (कार्बो वेज 30, या 200, दिन में 2 बार)

बहुत घी , तेल वाली चीजें न खाएं l हरी सब्जियां व मौसमी फल अधिक खाएं

lतुतलाना, हकलाना – Stammering, Lisping

● जब रोग जुबान मोटी होने के कारण हो – (नैट्रम कार्ब 30, दिन में 3 बार)

● बच्चों का तुतलाना – (बोविस्टा 30, दिन में 3 बार)

● प्रमुख औषधि। काफी प्रयास करने के बाद ही मुंह से कोई शब्द निकले – (स्ट्रामोनियम 30 या 200)

● रोगी जब रुक रुक कर बात करें – (काली ब्रोम 6, दिन में 3 बार)

● बोलते समय बीच-बीच में शब्द छूट जाए – ( कैमोमिला 30,दिन में 3 बार)

● बोलते समय रोगी गलत शब्दों का प्रयोग करे – (लाइकोपोडियम 30, दिन में 3 बार)

● शब्द मुंह में आते आते मुंह में ही रह जाए – ( साइक्युटा 30, दिन में 3 बार)

● रोगी जब सिर्फ कुछ खास शब्दों पर ही अटके – (लैकेसिस 30, दिन में 2 बार)

न्यूमोनिया – Pneumonia

फेफड़ों के तंतुओं में सूजन हो जाने को न्यूमोनिया कहते हैं l

लक्षण : पहली या आरंभिक अवस्था में ठण्ड लगने के कारण फेफड़े में सूजन हो जाती है और सांस लेने में कष्ट होता है l तेज बुखार, बेचैंनी, प्यास आदि लक्षण होते हैं l दूसरी अवस्था में बलगम बनकर सारे फेफड़े में फ़ैल जाता है ; इस अवस्था में बलगम में खून भी आने लगता है और फेफड़ा कड़ा हो जाता है l यह अवस्था 4-18 दिन तक रह सकती है l तीसरी अवस्था: आराम होने की ओर बढ़ने वाली अवस्था l इसमें स्राव जज्ब (Absorb)होने लगता है तथा फेफड़ा पुनः काम करने लगता है l अगर स्राव जज्ब न हो तो रोगी मर भी सकता है l आरंभिक अवस्था में दवा देकर योग्य डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए l

● बीमारी की शुरू की हालत में जब कंपकंपी तेज हो l तेज बुखार, बेचैंनी, प्यास, डर व खुश्क खांसी हो – (एकोनाइट 30, हर आधे घन्टे पर)

● जब रोग रात में 12 बजे के बाद बढ़े, रोगी सुस्त हो, बेचैंनी महसूस करे व थोड़ा-थोड़ा पानी थोड़ी-थोड़ी देर के अंतर से पिये – (आर्सेनिक एल्ब 30, हर 2 घंटे पर)

● तेज बुखार के साथ बेहोशी, चेहरा तमतमाया लाल, ढके हुए अंगों पर पसीना; और खून का मस्तिष्क व छाती में जमाव हो – (बेलाडोना 30, हर 2 घंटे पर)

● जब बेचैंनी ख़त्म होने पर रोगी चुपचाप पड़ा रहे, हिलने-डुलने से रोग बढ़े, छाती में दर्द व दबाव महसूस हो, खासने से छाती व माथे में दर्द – (ब्रायोनिया 30, दिन में 4 बार)

● जब बलगम मवाद की तरह का हो, ठण्ड से रोग बढ़े, रोगी ठंडी प्रकृति का हो – (हिपर सल्फ़ 30, दिन में 3-4 बार)

● जब खूब पसीना आये मगर आराम न मिले, रोग रात में बढ़े – (मर्क सौल 30, दिन में 3-4 बार)

● सुखी खांसी, छाती में दर्द, खून मिला बलगम, ठंडा पीने की इच्छा l आखिरी अवस्था में – (फ़ॉसफोरस 30, दिन में 3-4 बार)

● छाती में बलगम घड़घड़ाये मगर फिर भी न निकले; जीभ सफ़ेद – (एंटीम टार्ट 30 या 200, 2-3 खुराक)

● आखिरी अवस्था में जब रोगी ठंडा होने लगे, ठंडा पसीना आए – (विरेट्रम एल्ब 30, 15-20 मिनट पर)

छाती को रुई से ढकना अच्छा है पर अनावश्यक रूप से कपड़े न लादें जायें l ठंडी हवा से बचाव करें l खाने पीने में हल्का व थोड़ा गर्म खाना दें l दलिया, कॉर्नफ्लेक्स, दूध, रोटी, गर्म दूध के साथ खजूर व बनफशा दूध में उबालकर देने से लाभ होता है l

आधा सीसी का दर्द – Migraine

सिर के किसी एक तरफ होने वाला भयंकर दर्द जो आमतौर पर उल्टी होने के बाद शांत हो आधा सीसी का दर्द कहलाता है। रोगी दर्द के कारण तड़पता है, चुपचाप लेटे रहना चाहता है।

● धूप लगने, गैस या बिजली की रोशनी में काम करने से रोग बढ़े। सिर में अत्यधिक गर्मी महसूस हो – (ग्लोनॉइन 30, दिन में 4 बार)

● सिर दर्द खास कर बाईं ओर सोने से बढ़े, उल्टी लगने या मासिक स्राव के बाद थोड़ा आराम मिले – (लैकेसिस 30 या 200)

● तीव्र अवस्था मे; जब सिर दर्द असह्य हो – (डैमियाना Q)

● संवेदनशील व्यक्तियों में अचानक खुशी या गम के कारण भयंकर सिर दर्द – (कॉफिया 30 या 200)

सिर दर्द अध्याय भी देखें।

भगवान का भरोसा

(((भगवान का भरोसा)))
एक आदमी ने दुकानदार से पूछा – केले और सेवफल क्या भाव लगाऐ हैं ? केले 50 रु.दर्जन और सेब 80 रु. किलो ।
उसी समय एक गरीब सी औरत दुकान में आयी और बोली मुझे एक किलो सेब और एक दर्जन केले चाहिये – क्या भाव है भैया ? दुकानदार: केले 5 रु दर्जन और सेब 25 रु किलो। औरत ने कहा जल्दी से दे दीजिये । दुकान में पहले से मौजूद ग्राहक ने खा जाने वाली निगाहों से घूरकर दुकानदार को देखा । इससे पहले कि वो कुछ कहता – दुकानदार ने ग्राहक को इशारा करते हुये थोड़ा सा इंतजार करने को कहा।
औरत खुशी खुशी खरीदारी करके दुकान से निकलते हुये बड़बड़ाई – हे भगवान तेरा लाख- लाख शुक्र है , मेरे बच्चे फलों को खाकर बहुत खुश होंगे । औरत के जाने के बाद दुकानदार ने पहले से मौजूद ग्राहक की तरफ देखते हुये कहा : ईश्वर गवाह है भाई साहब ! मैंने आपको कोई धोखा देने की कोशिश नहीं की यह विधवा महिला है जो चार अनाथ बच्चों की मां है । किसी से भी किसी तरह की मदद लेने को तैयार नहीं है। मैंने कई बार कोशिश की है और हर बार नाकामी मिली है।तब मुझे यही तरीकीब सूझी है कि जब कभी ये आए तो मै उसे कम से कम दाम लगाकर चीज़े दे दूँ। मैं यह चाहता हूँ कि उसका भरम बना रहे और उसे लगे कि वह किसी की मोहताज नहीं है। मैं इस तरह भगवान के बन्दों की पूजा कर लेता हूँ ।
थोड़ा रूक कर दुकानदार बोला : यह औरत हफ्ते में एक बार आती है। भगवान गवाह है जिस दिन यह आ जाती है उस दिन मेरी बिक्री बढ़ जाती है और उस दिन परमात्मा मुझपर मेहरबान होजाता है । ग्राहक की आंखों में आंसू आ गए, उसने आगे बढकर दुकानदार को गले लगा लिया और बिना किसी शिकायत के अपना सौदा खरीदकर खुशी खुशी चला गया ।
कहानी का मर्म :-
खुशी अगर बांटना चाहो तो तरीका भी मिल जाता है l
संतमत विचार;-बस एक कोशिश कीजिये और अपने आसपास ऐसे ज़रूरतमंद यतीमों, बेसहाराओ को ढूंढिये और उनकी मदद किजिए …………………….
मंदिर मे सीमेंट या अन्न की बोरी देने से पहले अपने आस – पास किसी गरीब को देख लेना शायद उसको आटे की बोरी की ज्यादा जरुरत हो ।
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किसी गुरुप मे ऐसा देवता ईन्सान मिल जाऐ ।
कहीं एसे बच्चो को अपना भगवान मिल जाए ।
कुछ समय के लिए एक गरीब बेसहारा की आँख मे आँख डालकर देखे, आपको क्या महसूस होता है ।
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स्वयं में व समाज में बदलाव लाने के प्रयास जारी रखें ।